Thursday, July 22, 2021

शब्द

मेरे पास शब्द नहीं
कुछ कहने के लिए,
गया था शब्दों  के शहर
कुछ शब्द उधार लेने
बाँधी पोटली उसने देने के लिए

अचानक , उसने पूछ डाला ,
क्यूँ चाहिए शब्द आपको
सुनकर मेरा जवाब
वो तो गायब हो गया

और जाते हुए कह गया
मैं ऐसा व्यवहार नहीं करता
बस शब्दों को सींचता हूँ
उनका व्यापार नहीं करता |

Friday, March 13, 2020

वो जगह कहाँ मिलेगा

यादों को जोड़कर बनी
पुरानी पर स्पष्ट है
ये जो तेरी तस्वीर है
वो जगह कहाँ मिलेगा
जहा तेरी तस्वीर लगाऊँ

मन तो मौसम की तरह है
बदलता रहता है
मचलता रहता है
तुम बदल ना जाओ
वो जगह कहाँ मिलेगा
जहाँ तेरी तस्वीर लगाऊँ

घर की दीवारें पत्थरों की हैं
मेरे दर्द को छुपाये रहतें हैं
उनके स्पर्श से तुम बदल ना जाओ
तेरी कोमलता को कैसे बचाऊँ
वो जगह कहाँ मिलेगा
जहाँ तेरी तस्वीर लगाऊँ

पलकों पर सजाऊँ
पर ये पलकें आँसुओ में डूबे रहतें हैं
कहीं तुम भींग ना जाओ
वो जगह कहाँ मिलेगा
जहाँ तेरी तस्वीर लगाऊँ |

कुछ तो अनकही सी बात है.....

छुपी तेरे हर एक मुस्कान में
कुछ तो अनकही सी बात है
तू कहती मैं बस यूँ ही अलबेली हूँ
ना बताती तू, बस रखती अपने आप में है
कुछ तो अनकही सी बात है.

पेड़ के झुर्मुट से हवा जब निकलती
लहरें जब साहिल को छूकर धरा पर उतरती
कि तेरे बाल जब तेरे चेहरे पर सिमटती
पर वही खामोशी आज भी है
ना बताती तू,  बस रखती अपने आप में है
कुछ तो अनकही सी बात है

कभी सोचा, ये कैसा श्वेत रंग है,
खुद को मिटा कर देता पहचान हर रंग को
किसी ने सोचा कभी  की
इस चमक के पीछे भी छपी कुछ बात है
ना बताती तू, बस रखती अपने आप में है
कुछ तो अनकही सी, बात है.

सोचती तू बहुत कुछ है
पर बताती नहीं है
पर ये तेरी मुस्कान बहुत कुछ छुपाती नहीं है
ना बताती तू, बस रखती अपने आप में है
कुछ तो अनकही सी, बात है |

एक बहाना

एक बहाना ही सही
जो तुझे करीब ला दे
रूठ जाना ही सही
और तमाम अनोखी कोशिशें
जो मुझे हंसा दे !!

यूँ तो मैं डरती नहीं
पर यूँ डर जाना ही सही
जो तेरा साथ दिला दे !!

एक बहाना ही सही ,
जो तुझे करीब ला दे !!

यूँ ही नाराज़ होना ही सही
जो अधूरेपन का एहसास दिला दे
और तेरी तमाम अनोखी कोशिशें मनाने की
जो मुझे फिर से हँसा दे !!

वो ख्वाब ही सही
जो तुम मुझमें और
मैं तुझमें होने का एहसास दिला दे
तेरे आने की आहट ही सही
जो मुझे फिर से जगा दे !!

एक बहाना ही सही,
जो तुझे करीब ला दे !!

एक जगह मैने बनाया है

किसी ना किसी पल मेरे होने का
जिक्र तो आएगा
दूरी कितनी ही हो
मन तो मुझे बुलाएगा
मेरे शब्द ही दस्तक बन जाएँगे
तुझे नींद से जगाएँगे
गर कभी मेरी पहचान भूलने लगो
तो ये शब्द ही तुझे बताएँगे
एक जगह मैंने बनाया है,
जहाँ कुछ यादें हैं,
जब बोझिल होने लगे मन
तब तुम जाना वहाँ,
यहाँ वही पल मिलेंगे,
जिसे हमने साथ बिताया था.
जब रूठने लगे खुशी तुमसे
तब तुम जाना वहाँ,
यहाँ वही पल मिलेंगे,
जिसने कभी तुम्हे हंसाया था.
जब अंधेरे से निकल ना पाओ,
तब तुम जाना वहाँ,
यहाँ वही रोशनी मिलेगी
जिसने कभी तुम्हे चाँदनी से नहलाया था.
जब थकने लगो जिंदगी से
तब तुम जाना वहाँ,
यहाँ वही ऊर्जा मिलेगी
जिसने पर दिए थे तुम्हे और
आकाश में उड़ाया था.
जब नींद ना आने लगे
तब तुम जाना वहाँ
यहाँ वही ख्वाब मिलेंगे
जिसने तुम्हे कभी सुलाया था.
जब अकेलापन सताने लगे
तब तुम जाना वहाँ
यहाँ मेरे कुछ शब्द गूंजते मिलेंगे
जिसने कभी मन बहलाया था  

Sunday, March 8, 2020

निशा की शांत गलियों में

विदा कर मिहिर को
थकी निष्प्राण धरती पर
सांझ की डोली,
घटाओं के शानों से उतरती है
छनकती चाँदनी के पाजेब से
टूटकर घूँगरू
ख्वाबों के आँगन बिखेरती है..

निशा की शांत गलियों में
स्मृति की फूँक से जब
अंतर्मन सुलगता है
कुछ विप्लवी शब्द
तोड़ देते हैं
हृदय के क़ैदखाने को..

निशा जब धरती पर मचलती है
सुलाकर सारे परिंदो को
ये निशब्द पत्तियाँ
रातभर जुगँनुओं से बातें करती हैं ..

शनैः शनैः सरकती निशा
थकी निष्प्राण लुढ़क कर
पहाड़ी के कोहान पर
सिर टिकाए
भोर की राह तकती है..

उड़ान

लो सहारा उस पवन के वेग का
निस्तेज़ और अद्रिश्य है जो धरा पर
बना दी पगडंडियाँ हैं प्रकृति ने
स्मरण करो स्वयं के अस्तित्व का

बनाकर पंख उसको,
उड़ चलो गगन में
वो है प्रतीक्षा में तुम्हारा
उत्तेजना के लहर से,
विस्मरण करो हर प्रतिबंध का
बस तुम हो,
ये जगत है तुम्हारा
ये जगत है तुम्हारा 

शब्द

मेरे पास शब्द नहीं कुछ कहने के लिए, गया था शब्दों  के शहर कुछ शब्द उधार लेने बाँधी पोटली उसने देने के लिए अचानक , उसने पूछ डाला , क्यूँ चाहि...