Friday, March 13, 2020

वो जगह कहाँ मिलेगा

यादों को जोड़कर बनी
पुरानी पर स्पष्ट है
ये जो तेरी तस्वीर है
वो जगह कहाँ मिलेगा
जहा तेरी तस्वीर लगाऊँ

मन तो मौसम की तरह है
बदलता रहता है
मचलता रहता है
तुम बदल ना जाओ
वो जगह कहाँ मिलेगा
जहाँ तेरी तस्वीर लगाऊँ

घर की दीवारें पत्थरों की हैं
मेरे दर्द को छुपाये रहतें हैं
उनके स्पर्श से तुम बदल ना जाओ
तेरी कोमलता को कैसे बचाऊँ
वो जगह कहाँ मिलेगा
जहाँ तेरी तस्वीर लगाऊँ

पलकों पर सजाऊँ
पर ये पलकें आँसुओ में डूबे रहतें हैं
कहीं तुम भींग ना जाओ
वो जगह कहाँ मिलेगा
जहाँ तेरी तस्वीर लगाऊँ |

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