छुपी तेरे हर एक मुस्कान में
कुछ तो अनकही सी बात है
तू कहती मैं बस यूँ ही अलबेली हूँ
ना बताती तू, बस रखती अपने आप में है
कुछ तो अनकही सी बात है.
पेड़ के झुर्मुट से हवा जब निकलती
लहरें जब साहिल को छूकर धरा पर उतरती
कि तेरे बाल जब तेरे चेहरे पर सिमटती
पर वही खामोशी आज भी है
ना बताती तू, बस रखती अपने आप में है
कुछ तो अनकही सी बात है
कभी सोचा, ये कैसा श्वेत रंग है,
खुद को मिटा कर देता पहचान हर रंग को
किसी ने सोचा कभी की
इस चमक के पीछे भी छपी कुछ बात है
ना बताती तू, बस रखती अपने आप में है
कुछ तो अनकही सी, बात है.
सोचती तू बहुत कुछ है
पर बताती नहीं है
पर ये तेरी मुस्कान बहुत कुछ छुपाती नहीं है
ना बताती तू, बस रखती अपने आप में है
कुछ तो अनकही सी, बात है |
कुछ तो अनकही सी बात है
तू कहती मैं बस यूँ ही अलबेली हूँ
ना बताती तू, बस रखती अपने आप में है
कुछ तो अनकही सी बात है.
पेड़ के झुर्मुट से हवा जब निकलती
लहरें जब साहिल को छूकर धरा पर उतरती
कि तेरे बाल जब तेरे चेहरे पर सिमटती
पर वही खामोशी आज भी है
ना बताती तू, बस रखती अपने आप में है
कुछ तो अनकही सी बात है
कभी सोचा, ये कैसा श्वेत रंग है,
खुद को मिटा कर देता पहचान हर रंग को
किसी ने सोचा कभी की
इस चमक के पीछे भी छपी कुछ बात है
ना बताती तू, बस रखती अपने आप में है
कुछ तो अनकही सी, बात है.
सोचती तू बहुत कुछ है
पर बताती नहीं है
पर ये तेरी मुस्कान बहुत कुछ छुपाती नहीं है
ना बताती तू, बस रखती अपने आप में है
कुछ तो अनकही सी, बात है |
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