Sunday, March 8, 2020

उड़ान

लो सहारा उस पवन के वेग का
निस्तेज़ और अद्रिश्य है जो धरा पर
बना दी पगडंडियाँ हैं प्रकृति ने
स्मरण करो स्वयं के अस्तित्व का

बनाकर पंख उसको,
उड़ चलो गगन में
वो है प्रतीक्षा में तुम्हारा
उत्तेजना के लहर से,
विस्मरण करो हर प्रतिबंध का
बस तुम हो,
ये जगत है तुम्हारा
ये जगत है तुम्हारा 

1 comment:

  1. Sorry, i don't understand Arabic.
    It'd be so nice of you if you translate the above comment to English.

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